Ladakh: लद्दाख के लोगों के लिए न्याय व्यवस्था को और सुलभ बनाने की दिशा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने एक नया नियम लागू किया है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट अब केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भी अपनी बैठकें कर सकेगा। यह निर्णय न केवल न्यायिक सुगमता की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव है, बल्कि सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों को उनके अधिकारों के प्रति सुरक्षा और कानूनी सशक्तिकरण का मजबूत भरोसा भी दिलाता है।
बता दे कि राष्ट्रपति ने ‘द यूनियन टेरिटरी ऑफ लद्दाख (सिटिंग ऑफ बेंच ऑफ द हाई कोर्ट ऑफ जम्मू एंड कश्मीर, एंड लद्दाख इन लद्दाख) रेगुलेशन, 2026’ को मंजूरी दे दी है। यह विनियमन संविधान के अनुच्छेद 240 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 58(2) के तहत जारी किया गया है। यह विनियमन लद्दाख में साझा हाई कोर्ट की एक पीठ के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
जानकारी के अनुसार, हाई कोर्ट के न्यायाधीश और खंडपीठ लद्दाख में किसी भी स्थान पर बैठ सकते हैं। इस स्थान का निर्धारण मुख्य न्यायाधीश द्वारा लद्दाख के उपराज्यपाल की मंजूरी से किया जाएगा। बता दे कि हाई कोर्ट की मौजूदा प्रधान पीठ में कोई बदलाव नहीं होगा। मुख्य न्यायाधीश को यह अधिकार भी होगा कि वे लद्दाख से संबंधित किसी भी मामले को श्रीनगर या जम्मू में सुनवाई के लिए निर्देशित कर सकें।
राष्ट्रपति ने किस सांविधानिक शक्ति का प्रयोग किया
बता दे कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत अपनी विशिष्ट सांविधानिक शक्ति का प्रयोग किया है। यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को कुछ केंद्र शासित प्रदेशों की शांति, प्रगति और सुशासन के लिए विनियमन बनाने का अधिकार देता है। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019, अनुच्छेद 240 के साथ मिलकर लद्दाख के संबंध में ऐसे विनियमों का सांविधानिक और वैधानिक आधार प्रदान करता है। अनुच्छेद 240 के तहत शक्ति का प्रयोग करने के लिए संसद के अवकाश में होने की शर्त नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति के अध्यादेश से अलग है।