Astrology: सनातन धर्म में कार्तिक मास की अमावस्या तिथि के दिन दीवाली का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन धन-संपदा की प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। शास्त्रों में इस दिन मिट्टी के दीए जलाने का विशेष महत्व होता है क्योंकि, ऐसा माना जाता है कि दीवाली की रात जिस घर में दीयों को रोशनी रहती है वहां मां लक्ष्मी का आगमन होता है। मिट्टी के दीए को पंचतत्वों का प्रतीक माना जाता है, ऐस में जानिए दीवाली के दिन घी या तेल, किसका दीपक जलाना शुभ होता है और इसे जलाने के नियम।
हिंदू धर्म में घर या मंदिर में मिट्टी के दीए जलाने का विधान है। शास्त्र के अनुसार, दीपक जलाने से घर में सकारात्मक्ता का वास होता है। साथ ही उजाले की प्राप्ति होती है, इससे मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
दीपक जलाने के सही नियम
दीवाली के दिन पूजा करते समय मां लक्ष्मी के सामने घी और तेल दोनों का दीपक जलाना शुभ होता है। शास्त्रों के अनुसार, घी के दीपक को अपने बाएं हाथ वहीं, तेल के दीपक को अपने दाएं हाथ की ओर जलाना चाहिए।
घी के दीपक में फूलबत्ती जलाना चाहिए, वहीं, तेल के दीपक की बत्ती लंबी होनी चाहिए।
तिल के तेल का दीपक जलाते हैं तो उसमें पीली या लाल बत्ती जलानी चाहिए।
पूजा करते वक्त दीपक बुझना नहीं चाहिए। भगवान की मूर्ति के सामने ही हमेशा दीपक को रखना चाहिए।
किसी भी पूजा में खंडित दीपक का इस्तेमाल न करें।
कौन सा दीपक किस देवता के लिए जलाएं
मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, भगवान विष्णु, शिवजी और देवी दुर्गा के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए। घी का दीपक जलाने से आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
भैरव देवता के समक्ष तेल का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। माना जाता है कि इससे शत्रुओं का नाश होता है।
सूर्य देवता के समक्ष सरसों का दीपक जलाना चाहिए।
शनि देव को तिल या सरसो तेल का दीपक जलाना चाहिए। इससे सभी तरह की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। मनोकामना की पूर्ति के लिए तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
हनुमान जी को चमेली के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इससे संकटहरण हनुमानजी प्रसन्न होते हैं।
अलसी के तेल का दीपक राहु और केतु ग्रहों की दशा को शांत करने के लिए जलाना चाहिए।
दीपक जलाते वक्त करें इस मंत्र का जांप
शुभम करोति कल्याणं
आरोग्यं धन संपदाम्
शत्रु बुद्धि विनाशाय
दीपं ज्योति नमोस्तुते।