Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि श्रीरामेश्वर महादेव की स्थापना, श्री राम सेतु का निर्माण, श्री राम सेना का लंका पहुंचना, श्री राम रावण युद्ध, लंका विजय करके प्रभु श्री राम का अयोध्या पहुंचना एवं श्रीराम राज्याभिषेक। भारतीय संस्कृति में चार धाम बताये गये हैं। प्रत्येक भारतवासी को जीवन में कम से कम एक बार चार धाम की यात्रा अवश्य करना चाहिए। सतयुग का धाम बद्रीनाथ, त्रेता का धाम श्री रामेश्वरम, द्वापर का धाम द्वारिका और कलियुग का धाम श्री जगन्नाथ पुरी।
श्री राम सेतु निर्माण के समय प्रभु श्री राम ने अपने हाथों त्रेता के धाम रामेश्वरम् की स्थापना की। श्री रामेश्वर महादेव के दर्शन पूजन की महिमा प्रभु श्री राम स्वयं बताते, जो रामेश्वर महादेव का दर्शन करेंगे उसके पुण्य से जब भी उनका सौ वर्ष पूरा होगा, वे भगवान के धाम की प्राप्ति करेंगे। जीवन सफल होगा। जो गंगोत्री से गंगाजल ले जा करके श्रीरामेश्वर महादेव को चढ़ायेंगे उन्हें सायुज्य मुक्ति मिलेगी अर्थात् भगवान के धाम साकेत में उनको निकट सेवा का अवसर प्राप्त होगा। समस्त तीर्थो की यात्रा का अपने आप में विशिष्ट फल है, इसलिए अवसर मिलने पर सबको तीर्थ यात्रा करना ही चाहिए।
श्री राम जी का रावण के साथ युद्ध होता है। जिसमें रावण की हार हुई, भगवान श्री राम विजई हुए। इसको महापुरुषों ने बुराई पर सच्चाई की विजय बताया है। आज भी रावण का पुतला जलाया जाता है और भगवान श्री राम जी के मंदिर बनाए जाते हैं। घर-घर श्री राम जी की पूजा होती है। इससे संकेत यही है कि जो श्री राम जैसे कर्म करेंगे, सच्चाई के मार्ग पर चलेंगे, उनके प्रति सबके हृदय में सम्मान होगा। अगर कोई रावण जैसा कर्म करेगा तो समाज उसे कभी क्षमा नहीं करेगा।
लंका विजय करके प्रभु श्री राम अयोध्या पधारते हैं। प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक होता है। पूज्य गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज ने उत्तरकाण्ड में राम राज्य की महिमा का वर्णन किया है। राम राज बैठे त्रैलोका।
हरषित भये गये सब शोका।। दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि व्यापा।।
बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप विषमता खोई।।
श्री राम राज्य में हर कोई एक दूसरे का सम्मान करते हैं। सभी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए ईश्वर की आराधना करते हैं। ऐसा कभी हमारे जीवन में, परिवार में, समाज में आवे तो समझना चाहिए कि- हमारे जीवन में, परिवार में और समाज में रामराज्य की स्थापना हो गई।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).