Mobile side effects: मोबाइल फोन हम सभी की जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है. वहीं दूसरी ओर मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल के कारण लोगों को इसके नकारात्मक परिणाम भी भुगतने पड़ रहे हैं. जो कि खास तौर पर युवाओं के व्यवहार को प्रभावित कर रहा है. मोबाइल के इस्तेमाल से निकलने वाली ब्लू लाइट को नींद, ब्रेन हेल्थ के लिए नुकसानदायक बताया जाता रहा है. जिससे ज्यादातर युवाओं में तनाव, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन होने का खतरा काफी बढ़ गया है.
फोन के इस्तेमाल से कैंसर का खतरा नहीं
वैज्ञानिकों ने यह भी साफ कहा कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल से कैंसर का खतरा नहीं है. मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल कई दूसरी तरह की दिक्कतें बढ़ाता हुआ देखा गया है, जिसको लेकर अलर्ट रहना चाहिए. विशेषतौर पर बच्चों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को कम करना बहुत जरूरी है.
अध्ययन में क्या सामने आया?
मेलाटोनिन हार्मोन में बाधा: मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) हमारे मस्तिष्क में मेलाटोनिन (नींद लाने वाले हार्मोन) के उत्पादन को बाधित करती है, जिससे अनिद्रा की समस्या और मानसिक तनाव बढ़ता है.
टेक्स्ट नेक सिंड्रोम: देर तक सिर झुकाकर मोबाइल चलाने से गर्दन और रीढ़ पर कई गुना अधिक दबाव पड़ता है, जिससे पीठ, कंधों और गर्दन में असहनीय दर्द व जकड़न की समस्या आम हो रही है.
स्मार्टफोन लत और ध्यान में कमी: जरूरत से ज्यादा फोन का उपयोग करने वाले लोगों में फोकस (ध्यान केंद्रित करने की क्षमता) कम होने और स्वभाव में चिड़चिड़ापन आने के प्रमाण मिले हैं.
आंखों के रोग: डिजिटल स्क्रीन को लगातार देखने से आंखों में सूखापन, पानी आना और कमजोर दृष्टि जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं.
किन बातों का रखे ख्याल
रात को सोने से 1 घंटा पहले मोबाइल को साइड में रख देना चाहिए.
फोन के नोटिफिकेशन को भी बंद कर देना चाहिए ताकि नींद लेते वक्त किसी तरह का खलल ना पड़े.
करीब 6-7 घंटे की नींद पूरी करे.
सोते हुए किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट अपने पास ना रखे.
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