Ghazipur: गाजीपुर जनपद के मनिहारी ब्लॉक अंतर्गत स्थित ग्राम धाँवा में प्राप्त प्राचीन अवशेषों को लेकर किए गए प्रयास अब महत्वपूर्ण परिणामों के रूप में सामने आने लगे हैं। समाजसेवी सिद्धार्थ राय द्वारा लगातार उठाए गए मुद्दे एवं उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग को भेजे गए पत्रों के बाद विभाग ने मामले का संज्ञान लिया, जिसके उपरांत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की टीम ने ग्राम धाँवा में क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया।
रविवार को बीएचयू की सर्वेक्षण टीम गाँव पहुँची। सर्वेक्षण दल का नेतृत्व विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जोस टॉम राफेल ने किया। टीम में मनीष राय, प्रतीक पांडेय, सत्यम भारती, श्रवण सिंह, नेहा सिंह (सीनियर रिसर्च स्कॉलर), कौस्तुभ संग्राम, रितेश, स्मृति एवं हिमांशु सिंह (मास्टर्स छात्र) शामिल रहे। टीम ने गाँव के भीतर सात विभिन्न स्थलों का दस्तावेजीकरण करते हुए कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त किए।
सर्वेक्षण में मंदिर स्थापत्य अवशेष, शिवलिंग का अरघा, मध्यकालीन ईंटें, तीन प्राचीन कुएँ, अंगूठे के निशान वाले टेराकोटा डिस्क, ग्लेज़्ड वेयर, अभ्रकीय लाल मृदभांड (Micaceous Red Ware Pottery), लौह अवशेष (Iron Slag), मनके, भगवान विष्णु की संभावित खंडित प्रतिमा, तथा एक छोटे टीले की सतह पर दिखाई देने वाले पशुओं के दाँत एवं अस्थि अवशेष जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
सर्वेक्षण दल के अनुसार, ये अवशेष इस बात की ओर संकेत करते हैं कि ग्राम धाँवा मध्यकाल में एक महत्वपूर्ण मानव बसावट रहा होगा। साथ ही, कई पुरावशेष ऐसे भी मिले हैं जो इससे भी प्राचीन काल की सांस्कृतिक एवं मानवीय गतिविधियों की ओर संकेत करते हैं।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग, लखनऊ द्वारा क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई, वाराणसी को स्थल निरीक्षण कर विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश भी जारी किए गए थे।
समाजसेवी सिद्धार्थ राय ने कहा कि यदि ग्राम धाँवा में वैज्ञानिक एवं विस्तृत पुरातात्विक अध्ययन कराया जाए, तो यह क्षेत्र पूर्वांचल के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में अपनी पहचान बना सकता है। उन्होंने पुरातत्व विभाग से आगे भी गहन अध्ययन एवं संरक्षण कार्य कराने की मांग की है।