स्पेस में माइक्रोग्रैविटी के बीच खुद को कैसे फिट रखते हैं एस्ट्रोनॉट्स? जानिए कैसे करते हैं एक्सरसाइज

Astronauts in Space: हमारे ब्राह्माण में मौजूद विभिन्‍न रहस्‍यों को जानने के लिए दुनियाभर से एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में जाते हैं और कई दिनों तक वहां रहकर अपने मिशन को पूरा करते है. लेकिन स्‍पेस में गुरुत्वाकर्षण न के बराबर (माइक्रोग्रैविटी) होने के वजह से वहां रहना रहना काफी मुश्किल होता है.

अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के वजह से एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं. पृथ्वी पर रोजाना चलने-फिरने से हड्डियों और मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जो उन्हें मजबूत रखता है. वहीं, स्पेस में ऐसा दबाव नहीं मिलता, इसलिए हड्डियां हर महीने 1 प्रतिशत तक कमजोर हो सकती हैं और मांसपेशियां सिकुड़कर कमजोर पड़ जाती हैं.  ऐसे में अगर कोई कदम न उठाया जाए, तो लंबे मिशन में एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियां और मांसपेशियां बुजुर्गों जैसी कमजोर हो सकती हैं.

स्‍पेस में ही रोजाना एक्‍सरसाइज करते है एस्‍ट्रोनॉट्स

इसी समस्या से निपटने के लिए एस्ट्रोनॉट्स इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर रोजाना औसतन दो घंटे एक्सरसाइज करते हैं. यह एक्सरसाइज उनके लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह हड्डी और मांसपेशियों के नुकसान को काफी हद तक रोकती है. शुरुआती मिशनों में सिर्फ इलास्टिक बैंड से एक्सरसाइज होती थी, लेकिन अब इक्विपमेंट बहुत एडवांस्ड हो गए हैं.

एक्‍सरसाइज में उपयोग होने वाले प्रमुख उपकरण

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा मुख्य उपकरणों के बारे में विस्तार से जानकारी देता है-

एडवांस्ड रेसिस्टिव एक्सरसाइज डिवाइस साल 2008 में लगाया गया था, यह डिवाइस वजन उठाने जैसा महसूस कराता है. इसमें पिस्टन और फ्लाईव्हील सिस्टम से 600 पाउंड तक रेजिस्टेंस मिलता है. एस्ट्रोनॉट्स इससे स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट्स और बेंच प्रेस जैसी एक्सरसाइज करते हैं.

दूसरा है टी2 ट्रेडमिल, जिसमें हार्नेस और बंजी से एस्ट्रोनॉट को बेल्ट से बांधा जाता है ताकि वे उड़ न जाएं. इससे दौड़ने या तेज चलने की एक्सरसाइज होती है.

साइकल एरगोमीटर विद वाइब्रेशन आइसोलेशन एंड स्टेबलाइजेश साल 2001 में लगा और साल 2023 में अपग्रेड हुआ यह साइकिल मशीन है, जो कंप्यूटर कंट्रोल से सटीक वर्कलोड मिलता है, हार्ट रेट और स्पीड दिखाता है.

बता दें कि ये उपकरण वाइब्रेशन को अलग रखते हैं ताकि स्पेस स्टेशन हिले नहीं. एस्ट्रोनॉट्स एरोबिक (दौड़ना, साइकिलिंग) और रेजिस्टेंस (वजन उठाना) दोनों तरह की एक्सरसाइज करते हैं. पहले कम स्पीड और लंबे समय तक एक्सरसाइज होती थी, लेकिन अब हाई-इंटेंसिटी, कम समय वाली एक्सरसाइज ज्यादा असरदार साबित हुई है.

इस एक्सरसाइज से बेहतर होती है मांसपेशियां और हड्डियां

एक अध्यन अनुसार, हाई-इंटेंसिटी, लो-वॉल्यूम एक्सरसाइज से मांसपेशियां और हड्डियां बेहतर रहती हैं और समय भी बचता है. इससे क्रू मेंबर्स के पास मिशन के अन्य कामों के लिए ज्यादा समय मिलता है. एक तरह के जांच वीओ2मैक्स से पता चला कि लंबे स्पेसफ्लाइट में ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम होती है, इसलिए एक्सरसाइज को और बेहतर बनाना जरूरी है.

अध्यन से भी यही पता चला कि प्री-फ्लाइट ट्रेनिंग से स्पेस में परफॉर्मेंस बेहतर रहती है. मसल बायोप्सी से मॉलिक्यूलर स्तर पर बदलाव देखे गए, जो दिखाते हैं कि मौजूदा एक्सरसाइज प्रोग्राम मांसपेशियों को काफी हद तक बचाते हैं. हालांकि, हर एस्ट्रोनॉट का रिस्पॉन्स अलग होता है. स्पेस में कम जगह, उपकरणों की मरम्मत और गर्मी-नमी जैसी चुनौतियां रहती हैं.

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