Delhi: भारत रक्षा क्षेत्र में नेक्स्ट जेनरेशन तकनीक और स्वदेशी क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में स्वदेशी तकनीक से विकसित ‘मातंगी’ ऑटोनॉमस सरफेस वेसल (ASV) भारत की समुद्री क्षमता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सागर डिफेंस इंजीनियरिंग द्वारा विकसित मातंगी एक ऐसा मानवरहित सतही पोत है, जो बिना किसी इंसान के सवार हुए समुद्र में लंबी दूरी तय करने में सक्षम है।
समुद्र का ‘भूतिया जहाज’ – मातंगी
पहला नाम है ‘मातंगी’. दिखने में एक छोटी नाव जैसी, लेकिन काम बड़े युद्धपोत जैसा. पुणे की सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने इसे बनाया है. ये पूरी तरह मानवरहित है.इसकी सबसे बड़ी परीक्षा 2024 में हुई, जब ये मुंबई से तमिलनाडु के तूतीकोरिन तक 1500 किलोमीटर का सफर बिना किसी इंसान के पूरा करके लौटी. न कोई ड्राइवर, न कोई रिमोट कंट्रोल. खुद ही रास्ता खोजा, खुद ही लहरों और दूसरे जहाजों से बचकर निकली. नौसेना के लिए ये भविष्य में जासूसी और निगरानी का सबसे सस्ता और सुरक्षित हथियार बनेगी.
हवा में उड़ता ‘वरुणा’ – जो इंसान को पीठ पर बिठा ले
दूसरा धमाका हवा में हुआ. इसी कंपनी ने ‘वरुणा’ नाम का ऐसा ड्रोन बनाया जो 150 किलो वजन वाले एक पूरे इंसान को लेकर उड़ सकता है. पीएम मोदी खुद 2022 में इसका डेमो देख चुके हैं.सोचिए, समंदर के बीच एक युद्धपोत से दूसरे युद्धपोत पर गोला-बारूद, दवा या खाना पहुंचाना हो, तो अब हेलीकॉप्टर नहीं, ये ड्रोन जाएगा. ये अपने आप टेक-ऑफ और लैंड कर लेता है और अब भारतीय नौसेना में शामिल भी हो चुका है.
1.18 लाख फीट से हमला करेगा भारत का नया बाज
तीसरी तकनीक सबसे खतरनाक है. बेंगलुरु के स्टार्टअप कलाम लैब्स ने एक ऐसा UAV बनाया है जो जमीन से नहीं, बल्कि 1,18,000 फीट ऊपर उड़ रहे गुब्बारे से लॉन्च होगा.इतनी ऊंचाई अंतरिक्ष की सीमा के करीब है, जहां दुश्मन का कोई रडार नहीं पहुंचता. वहां से छोड़ा गया ये ड्रोन दुश्मन पर नजर रखेगा और उसे पता भी नहीं चलेगा.तीनों तकनीकें साबित करती हैं कि भारत अब रक्षा तकनीक खरीदने वाला नहीं, बल्कि दुनिया को बेचने वाला देश बनने की राह पर है.