New Delh: प्रशांत महासागर में बनने वाली जलवायु अल नीनो का असर कई देशों में शुरू हो गया है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन ने भारत सहित एशिया के कई देशों चेतावनी दी है कि इसका असर कृषि और खाद्य सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
इसके असर से भारत में मानसून कमजोर पड़ने की संभावना जताई गई है, जिससे धान और मक्का जैसी वर्षा आधारित फसलों के उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार, अल नीनो के प्रभाव से भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने के संकेत है। जिससे खेती के लिए आवश्यक नमी में कमी आएगी और फसलों की वृद्धि में कमी होगी। धान और मक्का जैसी खरीफ फसलें मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर होती हैं, इसलिए इनके उत्पादन में गिरावट की आशंका बनी हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत, पाकिस्तान, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया और तिमोर-लेस्ते जैसे देशों में सूखे का खतरा बढ़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अल नीनो का प्रभाव केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर वैश्विक खाद्य बाजारों और कीमतों पर भी पड़ सकता है। उत्पादन में कमी आने से खाद्यान्न आपूर्ति प्रभावित होगी और कई देशों को आयात पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है।