New Delhi: प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए यूपी के बुलंदशहर, दिल्ली और पंजाब में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई करीब 450 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच की जा रही है।
शेल कंपनियों के जरिए 450 करोड़ का हुआ घोटाला
बता दें कि ईडी की यह जांच सीबीआई के मामले से जुड़ी हुई है, जिसमें बैंकों के ग्रुप से लिए गए करीब 450 करोड़ रुपये के कथित बैंक फ्रॉड का मामला शामिल है। पड़ताल में पता चला है कि लोन के रुपये को कथित तौर पर शेल कंपनियों, अकोमोडेशन एंट्री ऑपरेटरों और अन्य कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से फर्जी इनवॉइस और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के जरिए दूसरी जगहों पर भेजा गया।
8 जगहों पर छापेमारी कर रही ED
जिनमें प्रमोटर्स, संबंधित कंपनियों और मदद करने वालों से जुड़े ठिकाने शामिल हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पंजाब में 8 जगहों पर ईडी की टीम तलाशी ले रही है, तलाशी अभियान तेजी से चल रहा है। आगे की जांच जारी है।
शेल कंपनियां क्या होती हैं?
शेल कंपनियां वे कंपनियां होती हैं जो केवल कागजों पर अस्तित्व में होती हैं, इनका असल में कोई व्यापार नहीं होता है। इनका ना ही ऑफिस होता है और कर्मचारी भी बस कागज पर दिखाने के लिए होते हैं। शेल कंपनियों का इस्तेमाल अक्सर घोटाले के लिए किया जाता है।
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट क्या है?
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी देश का एक प्रमुख कानून है। यह मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने, इलीगल प्रॉपर्टी को जब्त करने और आर्थिक अपराधियों को सजा दिलाने के लिए बना है। जो लोग विदेश से हवाला के जरिए काला धन मंगाकर देश में सफेद करने का काम करते हैं, उनपर भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट शिकंजा कसता है।