प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को सहेजना आवश्यक, देशभर में वनों को बचाने के सुप्रीम कोर्ट सख्त

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत के जंगलों को बचाने की जरुरत है। अदालत ने कहा कि झारखंड जैसे राज्यों में पारिस्थितिकी तंत्र को सहेजने की आवश्यकता पर जोर दिये जाए।

न्यायमूर्ति पीठ ने जेएसपीसीबी की ओर से पेश हुए वकील से कहा कि कुछ ऐसे राज्य हैं, जहां हम अपने प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बचा सकते हैं और झारखंड उनमें से एक हैं।

मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति पीठ ने कहा कि कुछ राज्यों में वन प्राकृतिक स्वर्ग जैसे मौजूद हैं और उन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय झारखंड हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

हाई कोर्ट ने गत अप्रैल में वनों या वन भूमि की सीमाओं के पास पत्थर खनन या स्टोन क्रशर लगाने के लिए सहमति से जुड़े निर्देश जारी किए थे। इससे पहले जनवरी में हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि राज्य में संरक्षित वनों की निर्धारित सीमाओं से एक किलोमीटर के भीतर पत्थर खनन या स्टोन क्रशर के लिए अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने भारत में कानूनी पेशों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री स्थापित करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार बार काउंसिल आफ इंडिया बीसीआइ और अन्य से प्रतिक्रिया की मांग की है। इस रजिस्ट्री में प्रत्येक नामांकित वकील के लिए एक अद्वितीय राष्ट्रीय वकील पहचानकर्ता शामिल होगा, ताकि फर्जी प्रैक्टिशनर्स पर अंकुश लगाया जा सके। यह याचिका बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआइ) द्वारा दायर की गई है, जिसमें बीसीआइ को अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 49 के तहत एक इंटरनेट मीडिया और डिजिटल आचार संहिता बनाने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

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