life style: आयुष मंत्रालय ने योग थेरेपी के सही और सुरक्षित उपयोग को लेकर लोगों को जागरूक किया है, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि योग थेरेपी एक व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण है, जिसमें अभ्यासों का चयन व्यक्ति की शारीरिक बनावट, जरूरतों और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए, हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, लचीलापन और आंतरिक स्वास्थ्य अलग-अलग होता है, ऐसे में सभी लोगों के लिए एक ही तरह के योगासन या अभ्यास उपयुक्त नहीं हो सकते, मंत्रालय ने योग्य योग चिकित्सक की निगरानी में अभ्यास करने, नियमितता बनाए रखने और जीवनशैली में जरूरी बदलाव करने पर जोर दिया है।
हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है योग थेरेपी
आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग थेरेपी में सभी के लिए एक जैसा तरीका अपनाना सही नहीं है, प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक संरचना, लचीलापन और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें अलग होती हैं, इसी वजह से योग अभ्यास का चयन भी व्यक्ति की स्थिति के अनुसार होना चाहिए, मंत्रालय ने सलाह दी है कि लोग योग्य योग चिकित्सक की निगरानी में ही अपने लिए उपयुक्त अभ्यास चुनें, इसके प्रभावी होने के लिए नियमित अभ्यास, जीवनशैली में उचित बदलाव और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी जरूरी है।
इन बीमारियों में सामान्य योगासन भी हो सकते हैं जोखिम भरे
आयुष मंत्रालय ने योग थेरेपी की सीमाओं को समझने की भी सलाह दी है, उच्च रक्तचाप, स्लिप डिस्क, हर्निया, हृदय रोग या हाल ही में सर्जरी कराने वाले लोगों के लिए सामान्य योगासन भी जोखिम भरे हो सकते हैं, मंत्रालय के मुताबिक, योग थेरेपी ऐसा उपचार नहीं है जिससे तुरंत राहत मिलने की उम्मीद की जाए, इसे चिकित्सा आपात स्थिति में भी उपयुक्त उपचार नहीं माना जा सकता, इसलिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में बिना सलाह के योग अभ्यास करना नुकसानदायक हो सकता है।
डॉक्टर के इलाज का विकल्प नहीं है योग थेरेपी
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि योग थेरेपी को चिकित्सा निदान या डॉक्टर द्वारा निर्धारित इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए, यह पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ पूरक रूप में काम कर सकती है, योग थेरेपी का वास्तविक प्रभाव तभी सामने आ सकता है, जब व्यक्ति की विशिष्ट स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसके लिए उपयुक्त अभ्यास निर्धारित किए जाएं, इसलिए बिना अपनी शारीरिक स्थिति समझे किसी दूसरे व्यक्ति के योग अभ्यास की नकल करना सही नहीं है।
सोशल मीडिया वीडियो देखकर कठिन योगासन करने से बचें
आयुष मंत्रालय ने ‘जागरूकता के साथ योगाभ्यास’ अभियान के तहत लोगों से जिम्मेदारी के साथ योग करने की अपील की है, डिजिटल युग में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर कठिन योगासन करने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जानकारी और उचित मार्गदर्शन के अभाव में ऐसे अभ्यास चोटों का कारण बन सकते हैं, मंत्रालय के अनुसार, योग की अधूरी जानकारी और बिना सोचे-समझे किया गया अभ्यास लाभ के बजाय गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, ऐसे में योग को समझ-बूझकर अपनाना चाहिए और किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।