पटना में ‘अल्ट्रापॉड’ शुरु करने तैयारी तेज, अब सफर होगा आसान?

Bihar: पटना में आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था शुरू करने की दिशा में तेजी से का हो रहा है. इसके लिए विश्वेश्वरैया भवन से विधानसभा होते हुए सचिवालय तक लगभग 5 किलोमीटर के क्षेत्र में ‘अल्ट्रा पॉड्स’ के संचालन की तैयारी जोरों पर है. लगभग 296 करोड़ रुपये की लागत से अल्ट्रापॉड्स पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (पीआरटी) प्रणाली का निर्माण किया जाएगा। पूरे ट्रैक पर कुल 59 अल्ट्रा पॉड्स का संचालन किया जाएगा, जिससे यात्रा तेज और निर्बाध होगी।

शुरुआती चरण में कितने स्टेशन बनेंगे

शुरुआती फेज में 9 स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें से दो स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा भी होगी। परियोजना के तहत एक नियंत्रण कक्ष और अल्ट्रापॉड पार्किंग सुविधा भी स्थापित की जाएगी। इस परियोजना की खासियत यह है कि यात्रियों को हर 7 सेकंड के अंतराल पर अगला पॉड उपलब्ध होगा। एक पॉड में एक साथ 6 लोग यात्रा कर सकेंगे।

यात्रा होगी आसान

यह प्रणाली सरकारी कामकाज के लिए मोटर वाहनों के उपयोग को कम करने में मदद करेगी, जिससे उत्सर्जन घटेगा और प्रशासनिक क्षेत्र में, विशेषकर सुबह और शाम के कार्यालय समय के दौरान, यातायात दबाव कम होगा। बयान के अनुसार इस सेवा का किराया नाममात्र रखा जाएगा और यात्री टोकन या रिचार्जेबल कार्ड के माध्यम से इसका उपयोग कर सकेंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल भारत सरकार की ‘स्मार्ट, सतत और एकीकृत गतिशीलता’ की परिकल्पना के अनुरूप है।

पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा पर जोर

यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल और कार्बन-पॉजिटिव नेटवर्क है. ट्रैक निर्माण के दौरान किसी भी पेड़ को नहीं काटा जाएगा. मोटर चालित वाहनों की आवाजाही कम होने से क्षेत्र में उत्सर्जन और सड़क जाम में भारी कमी आएगी. नॉन-स्टॉप और स्वचालित संचालन से सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी, क्योंकि बाहरी हस्तक्षेप का खतरा न्यूनतम रहेगा.

क्या है अल्ट्रापॉड ?

अल्ट्रा पॉड एक रैपिड ट्रांजिट परिवहन है। इसमें छोटे-छोटे पॉड में बैठकर यात्री एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। इसे पॉड टैक्सी भी कहा जाता है। यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक परिवहन होता है और इसे बिना ड्राइवर के संचालित किया जाता है। इससे निर्धारित भवनों के बीच बिना किसी अनशेड्यूल्ड हॉल्ट के सीधे गंतव्य तक पहुंचा जा सकेगा। इससे बाहरी बाधाओं का जोखिम कम होगा और सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।

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