MP News: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित प्रसिद्ध भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने भोजशाला को लेकर हिंदू पक्ष की मांग को स्वीकार कर लिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में भोजशाला को मंदिर करार दिया है. हाई कोर्ट ने कहा कि हमने पाया है कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई है. धार में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं.
विवादित क्षेत्र “भोजशाला” था, जो परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता था. हाई कोर्ट ने कहा कि हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, ASI की अधिसूचनाओं और सर्वेक्षण रिपोर्ट पर विचार किया है. ASI एक्ट के वैधानिक प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले में स्थापित मिसाल के आधार पर और पुरातात्विक साक्ष्यों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ASI द्वारा किए गए ऐसे बहु-विषयक अध्ययनों के निष्कर्षों पर सुरक्षित रूप से भरोसा कर सकता है.
HC ने कहा कि हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका का निम्नलिखित निर्देशों के साथ निपटारा किया जाता है-
- हाईकोर्ट ने कहा कि-+ भोजशाला और कमल मौला मस्जिद का विवादित क्षेत्र 18/3/1904 से अधिनियम 1958 के तहत संरक्षित स्मारक है.
- इस क्षेत्र का धार्मिक स्वरूप देवी वाग्देवी सरस्वती के मंदिर सहित भोजशाला है.
- केंद्र सरकार और ASI धार में स्थित विवादित संपत्ति के अंतर्गत भोजशाला मंदिर और संस्कृत शिक्षण के उद्देश्यपूर्ण प्रशासन और प्रबंधन के लिए निर्णय लेंगे.
- ASI संपत्ति का समग्र प्रशासन जारी रखेगा.
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