UP News: उत्तर प्रदेश को डिजिटल और टेक्नोलॉजी हब बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार को एक और बड़ी सफलता मिली है. यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में बी.के. सेल्स कॉर्पोरेशन लगभग ₹400 करोड़ के निवेश से अत्याधुनिक हाइपरस्केल डेटा सेंटर स्थापित करेगा. गुरुवार को YEIDA के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने कंपनी को पांच एकड़ भूमि आवंटन का पत्र सौंपा. इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेन्द्र कुमार भाटिया भी मौजूद रहे.
योगी सरकार की नीतियों से मिला प्रोत्साहन
राज्य सरकार की डेटा सेंटर नीति, निवेश-अनुकूल वातावरण और सिंगल विंडो क्लियरेंस प्रणाली के कारण प्रदेश में बड़े निवेशकों का विश्वास लगातार बढ़ा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ विजन के अनुरूप यह निवेश प्रदेश को डिजिटल नवाचार के अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है.
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
- उत्तर भारत में डिजिटल अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में यह परियोजना मील का पत्थर सिद्ध होगी.
- इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का नेतृत्व कैलटेक (कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) के पूर्व छात्र करण गुप्ता करेंगे.
- यीडा सेक्टर में पांच एकड़ के प्राइम भूखंड पर स्थापित की जा रही यह हाइपरस्केल डेटा सेंटर परियोजना दो अत्याधुनिक डेटा सेंटर भवनों के रूप में विकसित होगी.
- इसकी कुल नियोजित क्षमता लगभग 7000 सर्वर रैक की होगी.
- परियोजना में दो चरणों में करीब ₹400 करोड़ का निवेश किया जाएगा तथा पूर्ण संचालन के बाद लगभग 100 योग्य पेशेवरों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा.
- भूमि हस्तांतरण के 18 माह के भीतर व्यावसायिक संचालन प्रारंभ करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
- यह डेटा सेंटर उच्च घनत्व डिजिटल संचालन और तेजी से बढ़ते एआई सेगमेंट को विशेष समर्थन प्रदान करेगा.
- साथ ही, यह व्यवसायियों, सरकारी संस्थाओं और डिजिटल स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक डिजिटल अवसंरचना उपलब्ध कराते हुए क्षेत्र में डेटा स्टोरेज, क्लाउड सेवाओं और एआई आधारित समाधानों के विकास को नई गति देगा.
सिम्प्लास्ट ग्रुप करेगा 70 करोड़ का निवेश
यह परियोजना भारत-इटली औद्योगिक सहयोग को नई मजबूती प्रदान करते हुए यमुना क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. कुल 70 करोड़ के निवेश से प्रदेश में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ेगा तथा कुशल, अर्द्ध-कुशल एवं अकुशल श्रमिकों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे. वहीं आपूर्तिकर्ताओं, लॉजिस्टिक्स, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों के माध्यम से बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रोजगार भी उत्पन्न होगा.
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