Mahakaleshwar Temple: मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक ऐसा मंदिर है, जहां खंडित शिवलिंग की पूजा होती है. यह स्वयंभू शिवलिंग है. इसे उज्जैन महाकाल का दूसरा उपलिंग माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि चारों धाम का जल यहां पर चढ़ाने से आपकी चारों धाम की यात्रा सफल हो जाती है और भगवान भोलेनाथ की कृपा से सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है.
यह सतना के बिरसिंहपुर कस्बे में गैवीनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध है, जहां खंडित शिवलिंग की पूजा के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. वहीं सावन माह और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं. इस शिवलिंग का वर्णन पाताल पुराण में किया गया है.
पद्म पुराण के अनुसार त्रेता युग में बिरसिंहपुर कस्बे में राजा वीरसिंह का राज हुआ करता था. उस समय बिरसिंहपुर का नाम देवपुर था. राजा वीर सिंह प्रतिदिन जल चढ़ाने के लिए घोड़े पर सवार होकर उज्जैन महाकाल जाते थे. करीब 60 सालों तक यह सिलसिला चलता रहा. इसके बाद भगवान महाकाल ने राजा वीर सिंह के स्वप्न में दर्शन दिए कि गैवी यादव नामक व्यक्ति के घर में शिवलिंग रूप निकलता है.
जिसके बाद गैवी के घर की जगह को खाली कराया गया. राजा ने उस स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया और भगवान महाकाल के कहने पर ही शिवलिंग का नाम गैवीनाथ धाम रख दिया गया. तब से भगवान भोलेनाथ को गैवीनाथ के नाम से जाना जाने लगा.”
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां पर चारों धाम से लौटने वाले भक्त भगवान भोलेनाथ के दर गैवीनाथ धाम पहुंचकर चारों धाम का जल चढ़ाते हैं. पूर्वज बताते हैं कि जितना चारों धाम भगवान का दर्शन करने से पुण्य मिलता है.उससे कहीं ज्यादा गैवीनाथ में जल चढ़ाने से मिलता है. लोग कहते हैं कि चारों धाम का जल अगर यहां नहीं चढ़ा तो चारों धाम की यात्रा अधूरी मानी जाती है यहां पर पूरे विंध्य क्षेत्र से भक्त पहुंचते है हर सोमवार यहां हजारों भक्त पहुंचकर भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं और मन्नत मांगते हैं और यहां आने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है.
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