Human organs: मेडिकल साइंस की दुनिया में जीवन और मृत्यु के बीज की लकीर उतनी सीधी नहीं है जितनी हमें दिखाई देती है. आम धारणा यह है कि धड़कन थमते ही जीवन का अंत हो जाता है, लेकिन हकीकत में शरीर के भीतर के कलपुर्जे एक साथ हार नहीं मानते. मौत के सन्नाटे के बाद भी जिस्म के कुछ हिस्से घंटों तक सांस लेते रहते हैं और ऑक्सीजन की अपनी आखिरी बूंदों के सहारे काम करने की कोशिश करते हैं. अंगों की यह ‘आफ्टरलाइफ’ ही वह उम्मीद है, जो किसी एक की अंतिम विदाई को किसी दूसरे के लिए नवजीवन का वरदान बना देती है.
दिल बंद कर देता है काम करना
मृत्यु के बाद हर मिनट शरीर में कुछ न कुछ बदलाव होना शुरू हो जाता है. सबसे पहले रिएक्शन हमारा दिल करता है और काम करना बंद कर देता है. दिल के बाद हमारे लंग्स काम करना बंद कर देते हैं क्योंकि दिल के काम करना बंद करते ही शरीर ऑक्सीजन की डिमांड करना बंद कर देती है.
लंग्स काम करना बंद कर देते हैं
लंग्स के काम बंद करते ही दिमाग भी काम करना बंद कर देता है क्योंकि दिमाग को काम करने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है, जो दिल के काम करने के बाद से उसे नहीं मिल पाती. इसके बाद हमारे शरीर में हार्ट पंपिंग बंद होने से ग्रेविटी के कारण ब्लड शरीर के निचले हिस्से की तरफ शिफ्ट होने लगता है. इस प्रक्रिया को लिवर मॉर्टिस कहते हैं.
हर अंग की अपनी लाइफ
मानव शरीर के सभी अंगों का लाइफस्पैन अलग-अलग होता है. मौत के बाद दिल आमतौर पर 4 से 6 घंटे तक जीवित रह सकता है, जबकि फेफड़े 4 से 8 घंटे तक उपयोग में लाए जा सकते हैं. लीवर करीब 8 से 12 घंटे तक सुरक्षित रहता है. आंखें लगभग 4 से 6 घंटे तक ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं. स्किन को 24 घंटे तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जबकि कुछ अंग इससे भी ज्यादा देर तक टिके रहते हैं.
सबसे ज्यादा देर तक जिंदा रहने वाला अंग कौन-सा है?
डॉक्टरों के अनुसार, इंसान के शरीर में मौत के बाद सबसे ज्यादा देर तक किडनी जीवित रहती है. किडनी लगभग 24 से 36 घंटे तक काम करने लायक स्थिति में रह सकती है. यही वजह है कि इसे शरीर का सबसे टिकाऊ अंग माना जाता है. किडनी को सही तापमान और कंडीशन में सुरक्षित रखकर सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया जा सकता है.
मौत के बाद भी कैसे काम आते हैं अंग?
जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तब भी उसके कुछ अंग पूरी तरह से निष्क्रिय नहीं होते हैं. इन्हीं अंगों को सही समय पर निकालकर विशेष परिस्थितियों में सुरक्षित किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया को ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन कहा जाता है. इसके जरिए एक मृत व्यक्ति कई जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी दे सकता है.
किन बातों पर निर्भर करता है अंगों का जीवित रहना?
मौत के बाद अंग कितनी देर तक जिंदा रहेंगे, यह कई बातों पर निर्भर करता है. जैसे मौत का कारण क्या था, शरीर का तापमान कितना है, अंग को कितनी जल्दी सुरक्षित किया गया और उसे किस तरह की मेडिकल सुविधाएं मिलीं. इसलिए ऊपर बताए गए समय को अनुमानित माना जाता है, न कि बिल्कुल तय समय.
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