CBSE Syllabus: देश की स्कूली शिक्षा में बड़ा और आधुनिक बदलाव शुरू हो चुका है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में CBSE के Computational Thinking (CT) और Artificial Intelligence (AI) आधारित नए पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया. यह सिलेबस शैक्षणिक सत्र 2026–27 से लागू किया जा रहा है, जिसका मकसद छात्रों को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करना है. CBSE द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह नया पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा (NCF 2023) के अनुरूप तैयार किया गया है. इसका फोकस पारंपरिक रटने की पढ़ाई से हटकर समझ, कौशल और वास्तविक जीवन में उपयोग होने वाली शिक्षा पर है.
नई पहल से बढ़ेगी ज्ञान की स्तर
प्रधान ने कहा कि यह कदम बच्चों को विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक ज्ञान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक हम नई पीढ़ी को डिजिटल और तकनीकी कौशल से लैस नहीं करेंगे, तब तक दुनिया में हमारी कोई खास पहचान नहीं बनेगी. मंत्री ने CBSE और NCERT की इस सराहनीय पहल के लिए बधाई दी.
AI पाठ्यक्रम की मुख्य विशेषताएं
यह नया सिलेबस 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू होगा. इसका मुख्य लक्ष्य “AI for Education” और “AI in Education” के विजन के साथ बच्चों में तार्किक सोच (Logical Thinking) और समस्या सुलझाने (Problem Solving) की क्षमता विकसित करना है.
कक्षा 3-5 (फाउंडेशनल): इसमें डिजिटल साक्षरता, बुनियादी कोडिंग एल्गोरिदम और मानवीय गतिविधियों में AI की भूमिका जैसे विषयों को शामिल किया गया है.
कक्षा 6-8 (मिडल): छात्र डेटा हैंडलिंग, मशीन लर्निंग के बुनियादी सिद्धांत, पायथन (Python) प्रोग्रामिंग की शुरुआत और AI नैतिकता (Ethics) के बारे में सीखेंगे.
विश्वस्तरीय शिक्षा की तैयारी: धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, सरकार स्कूलों में अत्याधुनिक ज्ञान देने के लिए प्रतिबद्ध है. इस पाठ्यक्रम को NCERT और CBSE द्वारा एक विशेष विशेषज्ञ समिति के माध्यम से तैयार किया गया है, जो रटने के बजाय रचनात्मकता और नवाचार (Innovation) पर केंद्रित है.
क्रियान्वयन: शिक्षकों के लिए विशेष हैंडबुक और प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं ताकि वे छात्रों को इन जटिल विषयों को आसानी से समझा सकें.
भाषाई विविधता का ध्यान
शिक्षा मंत्री ने NCERT को सलाह दी है कि वे पाठ्यक्रम का प्रसार विभिन्न भाषाओं में करें, ताकि सभी छात्र इसे आसानी से समझ सकें. शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम छात्रों को नई और उभरती तकनीक से परिचित कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
CT और AI पाठ्यक्रम का मकसद
कक्षा 3 से 8 में शुरू किया गया ‘कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ पाठ्यक्रम का उद्देश है बच्चों को डिजिटल और विश्लेषणात्मक कौशल की बुनियादी जानकारी देना. इससे बच्चे शुरुआती चरण में ही तकनीकी शिक्षा का लाभ ले सकेंगे. यह पहल एक नई सोच और नवाचार के लिए आवश्यक है, जो एनईपी के लक्ष्यों के अनुरूप है. सीबीएसई (CBSE) के नए ‘कंप्यूटेशनल थिंकिंग और AI’ पाठ्यक्रम में बच्चों को रटाने के बजाय “करके सीखने” (Learning by Doing) पर जोर दिया गया है. कक्षा-वार कुछ प्रमुख प्रोजेक्ट्स और गतिविधियां (Activities) इस प्रकार हैं.
1. फाउंडेशनल स्टेज (कक्षा 3 से 5)
इस स्तर पर बच्चों को खेल-खेल में लॉजिक (तर्क) समझाया जाएगा-
एल्गोरिदम गेम: रोजमर्रा के काम (जैसे चाय बनाना या स्कूल तैयार होना) को स्टेप-बाय-स्टेप लिखने की गतिविधि.
पैटर्न पहचान: चित्रों या नंबरों में समानता ढूँढना, जो AI के काम करने का आधार है.
ब्लॉक-आधारित कोडिंग: ‘Scratch’ जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग करके छोटे एनिमेशन या कहानियां बनाना.
स्मार्ट होम चर्चा: बच्चे पहचानेंगे कि उनके आसपास कौन से उपकरण (जैसे एलेक्सा या स्मार्ट टीवी) AI का उपयोग करते हैं.
2. मिडिल स्टेज (कक्षा 6 से 8)
यहाँ छात्र तकनीक के पीछे के विज्ञान को समझेंगे और छोटे वर्किंग मॉडल बनाएंगे-
चैटबॉट बनाना: Google Dialogflow या इसी तरह के टूल्स का उपयोग करके एक साधारण ‘FAQ चैटबॉट’ तैयार करना.
डेटा विज़ुअलाइज़ेशन: मौसम या स्कूल के अंकों के डेटा को ग्राफ और चार्ट के जरिए समझना.
फेस और वॉयस रिकग्निशन: सॉफ़्टवेयर के जरिए यह समझना कि कंप्यूटर चेहरे या आवाज़ को कैसे पहचानता है.
AI नैतिकता (Ethics): “क्या रोबोट को इंसानों की तरह सोचना चाहिए?” जैसे विषयों पर वाद-विवाद और केस स्टडी.
प्रोग्रामिंग: पायथन (Python) के माध्यम से छोटे गणितीय प्रोग्राम और गेम बनाना.
प्रमुख उद्देश्य: इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को केवल तकनीक का ‘उपयोगकर्ता’ (User) नहीं, बल्कि ‘निर्माता’ (Creator) बनाना है.
इसे भी पढ़ें:-AI, Artificial Intelligence, CBSE, Computational Thinking, CBSE Syllabus,सीबीएसई, एआई,