भगवान शिव अपने मंगलमय चरित्र से पूरे संसार को देते है भक्ति की शिक्षा: दिव्य मोरारी बापू

Rajasthan: दिव्य मोरारी बापू ने पुरुषोंत्तम मास के पावन अवसर पर श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव के कथा मे कहा कि भगवान शिव अपने मंगलमय चरित्र से पूरे संसार को भक्ति की शिक्षा देते हैं। कल्याण के अनेक साधन है जिसमें भक्ति सर्वोपरि है।

भक्ति चिंतामणि है। जिसके घर में बस जाती है, उनके लिये सदैव प्रकाश की प्रकाश रहता है। मोह रूपी दरिद्रता मिट जाती है। अज्ञान का अंधेरा सदा के लिये समाप्त हो जाता है। मदादि पतंगे इससे हार जाते हैं। काम आदि चोर, चोरी करने के लिये पास नहीं आ सकते। भक्ति मणि के प्रभाव से विष भी अमृत के समान हो जाता है। जीवन का दर्शन ही बदल जाता है। भक्त अभय हो जाता है।

 यदि जीव को भक्ति मणि मिल जाये तो अज्ञान की गांठ छूट जायेगी और जीवन कृत-कृत्य हो जायेगा। जहां भेद है, वहीं भय दिखाई देता है। प्रत्येक प्राणी में प्रभु की  चैतन्यमयी प्रतिमा के दर्शन हो रहे हैं। जब सबके भीतर प्रभु बैठे हैं, तो डर किसका? बैर किसके साथ? जहां हृदय की एकता है, वहां ही निर्भयता है। जो भगवद् मय है, वही संदेह रहित है।

प्रेम का पूर्णविराम अद्वैत भाव में है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) श्री दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

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