Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि रात्रि का पूर्ण अन्धकार है, बेड़ियां, हथकड़ियां लगी हुई थी। हाथ को हाथ दिखाई नहीं दे रहा था। देवकी जी वासुदेव से कहती हैं, हमें भी कभी इन बेड़ियों, हथकड़ियों से मुक्ति मिलेगी? हम भी कभी खुले आकाश में घूम सकेंगे? जानवर को भी कभी-कभी छोड़ा जाता है। हमें तो जानवर से भी ज्यादा बांध दिया गया है।
वसुदेव कहते हैं, देवी! भगवान् का ध्यान करो। क्यों चिन्ता करती हो? जब व्यक्ति चारों तरफ से असहाय हो जाये तब उसे भगवान का ध्यान करना चाहिये,वो असम्भव को सम्भव करके दिखा देता है। वह बड़ी से बड़ी विपत्ति से बचा लेता है। देवकी और वसुदेव के हाथों में हथकड़ियां हैं और पैरों में बेड़ियां हैं। अब दोनों भगवान से प्रार्थना करते हैं, हे दीन उद्धारक! हे करुणा निधान! अब हम पर दया करो।
हम अपने पुरुषार्थ से यह बन्धन नहीं कट पायेंगे, हम अपने पुरुषार्थ से कारागार से नहीं निकाल पायेंगे, हमें इन बन्धनों से मुक्त करो नाथ, हम आपको प्रणाम करते हैं। वे व्याकुल होकर आर्त पुकार से प्रार्थना कर रहे हैं। सहसा कारागार के अन्दर सहस्रों चन्द्रमा जैसा प्रकाश होता है और प्रकाश के बीच में ५ वर्ष के बालक, चतुर्भुज रूप में, शंख, चक्र, गदा और पद्म लिये हुए भगवान् श्रीकृष्ण का प्राकट्य हो जाता है। भगवान् प्रकट होते हैं। देवता पुष्प बरसाना शुरू कर देते हैं। बाजे बजाना शुरू कर देते हैं।
निराकार ब्रह्म साकार होकर प्रकट दिखता है। जिसका आकार न दिखे वो निराकार है। जिसका आकर देख सके वह सरकार है। जैसे अग्नि जब तक लकड़ी में छुपी है तब तक निराकार है और जब काष्ट जलने लगा तब अग्नि सकार हो गई। उसी तरह जब परमात्मा व्यापक रूप से सबमें समय रहता है, तब तक वो निराकार है और जब भक्तों को कृतार्थ करने के लिये, उनके व्याकुल व्यथित मन पर अपने दर्शन से शीतल अमृतधारा बरसाने के लिए जब वो समधुर रूप से प्रकट हो जाते हैं, तब वे साकार हैं।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).