Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि जहां आचार-विचार की शुद्धि है, वही भक्ति परिपुष्ट होती है। सदाचार नींव है, सद्विचार भवन है। नींवें मजबूत होंगी, तो भवन टिक सकेगा। गर्भवती स्त्री के आचार-विचार का गर्भस्थ शिशु पर बहुत गहरा असर होता है। स्नान से शरीर की शुद्धि, ध्यान से मन की शुद्धि और दान से धन की शुद्धि होती है। ध्यान का सच्चा आनन्द तो प्रातःकाल में ही प्राप्त किया जा सकता है।
ज्ञान का रूप यदि क्रिया में परिवर्तित नहीं होता तो वह रूखा है। सत्य को जानने के बाद यदि आचरण में ढाले तभी वह काम का है। ज्ञान की सार्थकता बात करने में नहीं, उसे पचाने में है। ज्ञान को अपने अनुभव में ढालने की आदत डालो। दुर्लभ मानव-देह प्रदान करने वाले माता-पिता के उपकार को कैसे भुलाया जा सकता है? संयम और सदाचार के बिना सुख और शांति कहां से प्राप्त हो। हम सब गीता का पाठ करते हैं तो अनाशक्ति का आचरण भी करें।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).