Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि मनुष्य के जीवन में अभाव कष्ट चिन्ता तभी तक है, जब तक उसके जीवन में भगवान शिव की उपासना आराधना नहीं है। श्रीशिवमहापुराण में भक्ति,ज्ञान,वैराग्य की प्राप्ति के लिए प्रारम्भ में श्रवण कीर्तन और मनन बताया है। भगवान के गुण समूह का श्रवण, भगवान के गुण समूह एवं नाम का कीर्तन करना, भगवान की विविध लीलाओं का मनन करना। अगर यह तीन साधन व्यक्ति के जीवन में हो जाय तो उसे भक्ति, ज्ञान, वैराग्य की प्राप्ति हो जाती है।
भगवान शंकर की उपासना दो रूपों में होती है, निर्गुण निराकार और सगुण सकार। शिवलिंग भगवान शंकर का निराकार स्वरूप है। शिवलिंग देखकर हम सब यह नहीं बता पायेंगे कि भगवान का हाथ कहां है, मुख कहां है अथवा चरण कहां है? शिवलिंग भगवान शंकर का निर्गुण निराकार ज्योति स्वरूप है। अगर हम आप चाहते हैं कि हमारे जीवन का अज्ञान रूपी अंधेरा समाप्त हो, जीवन में प्रकाश प्रगट हो तो हमें पूजा पाठ के समय शिवलिंग का ध्यान अवश्य करना चाहिए। नित्य शिवलिंग का ध्यान करने से भीतर की ज्योति प्रकट हो जाती है। शिवलिंग भगवान का निराकार स्वरूप है और जिसमें भगवान शंकर त्रिशूल हाथ में धारण किए हैं, ये भगवान का साकार विग्रह है। भगवान के किसी भी स्वरूप का पूजन करने से जीव का मंगल ही होता है।।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).
Badi Parikrama Marg, Danghati, District-Mathura, Ganahera, Govardhan, Govardhan Dham Colony, Pushkar District-Ajmer, Shri Divya Ghanshyam Dham, Uttar Pradesh) Shri Divya Morari Bapu Dham Seva,