Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि भगवती पार्वती का नामांकरण संस्कार, विद्याध्ययन संस्कार, भगवान शिव की प्राप्ति के लिए तप और श्रीशिव-पार्वती विवाह की कथा का गान किया गया।
भगवती पार्वती साक्षात् जगदम्बा हैं। सारी विद्या मां से ही प्रकट हुई है। माँ अपने अवतार के बाद लीला के माध्यम से हम आपको शिक्षा दे रही हैं कि अध्ययन तो होना ही चाहिए। ” स्वदेशे पूज्यते राजा, विद्वान सर्वत्र पूजयेत।” राजा अपने देश में पूजा जाता है जबकि पढ़े-लिखे व्यक्ति का सम्मान पूरे संसार में होता है। “आहार निद्रा भय मैथुनं च समानमेतत् पशुभि: नाराणां। ज्ञानो हि तेषां अधिको विशेषः ज्ञानेन हीनः पशुभि समानः।। मनुष्य दूसरे जीव जंतुओं से तीन विशेषताओं से बड़ा है।
धर्मे विशेषे, कर्मे विशेषे और ज्ञाने विशेषे। मनुष्य धर्म में बड़ा है, ज्ञान में बड़ा है, जिसके जीवन में न तो धर्म है, न कोई कर्म है और न ज्ञान है। वह मनुष्य रूप में दूसरे जीवों के समान है। ” साहित्य संगीत कला विहीनः। साक्षात् पशु पुच्छ विषाण हीनः।।
भगवान शिव को प्राप्त करने के लिये श्री नारद जी के मार्गदर्शन में भगवती पार्वती ने कठोर तप किया और भगवान शिव ने उन्हें विवाह का वचन दिया। इसके बाद बड़े धूमधाम से शिव पार्वती का विवाह उत्सव मनाया गया। कल की कथा में श्री गणेश जन्म की कथा होगी।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).