सत्संग के बिना विवेक नहीं होता जागृत: दिव्‍य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि सत्संग गंगा- सत्संग श्रीगंगाजी के समान है. सत्संग से जीवन में अद्भुत परिवर्तन होता है. कथा माता है. इससे भक्ति देश में व्यक्ति का नया जन्म होता है. इसीलिए कथा सुनने के बाद पुराने दोषों का नाश होना चाहिए.

कथा सुनने के बाद स्वभाव सुधरना चाहिए. कथा सुनने के बाद किये गये पापों के लिए मन में पछतावा होना चाहिए. कथा सुनने के बाद हृदय में यह भाव जागृत होना चाहिए कि मेरे पास जो कुछ है,वह प्रभु का है और मैं तो प्रभु का एक नन्हा सा सेवक हूँ.

नन्हा सा फूल हूँ मैं, चरणों की धूल हूँ मैं।

आया हूँ तेरे दरबार, प्रभु जी मेरी  सेवा करो स्वीकार।।

कथा सुनने के बाद हृदय में यदि ऐसे निर्मल भाव नहीं जगे तो मानना कि सुनी हुई कथा सफल नहीं हुई. सत्संग के बिना न तो विवेक जागृत होता है. और न स्वदोष का भान ही होता है. जो प्रभु एवं परोपकार के लिए पीड़ा सहता है, उसे रोना नहीं पड़ता. प्रवृत्ति का विषयानन्द छोड़ोगे तभी निवृत्ति का नित्यानंद प्राप्त कर सकोगे.

प्रभु की इच्छा में अपनी इच्छा मिला दो,निश्चित भक्ति बढ़ेगी. जिस तरह संसार के सुखों को प्राप्त करने के लिए पसीना बहाते हो, इसी तरह परमात्मा को प्राप्त करने के लिए भी पसीना बहाओ, कल्याण होगा. सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) श्री दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

 

		

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