Health care: धूम्रपान न केवल फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पूरे शरीर की सेहत को भी धीरे-धीरे खोखला कर देता है. सिगरेट या तंबाकू में मौजूद हानिकारक केमिकल्स फेफड़ों की सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं. लेकिन, अच्छी खबर यह है कि अगर आप धूम्रपान छोड़ देते हैं, तो शरीर खुद को रिपेयर करना शुरू कर देता है.
एक कड़वा सच है कि फेफड़े लीवर की तरह पूरी तरह से री-जेनरेट नहीं हो सकते. फेफड़ों के ऊतकों में अगर स्कारिंग या ‘एम्फिसीमा’ जैसी स्थिति पैदा हो चुकी है, तो वह स्थायी होती है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ‘इन्फ्लेमेशन’पूरी तरह खत्म हो सकती है. अगर कोई व्यक्ति सीओपीडी जैसी गंभीर स्थिति से पहले स्मोकिंग छोड़ देता है, तो उसके फेफड़े काफी हद तक स्वस्थ व्यक्ति की तरह काम करने लगते हैं.
स्मोकिंग छोड़ने के बाद फेफड़ों के ठीक होने की समयरेखा
72 घंटे बाद: शरीर से निकोटीन पूरी तरह निकल जाता है. फेफड़ों में ब्रोंकियल ट्यूब्स रिलैक्स होने लगती हैं, जिससे सांस लेना आसान हो जाता है.
2 सप्ताह से 3 महीने: फेफड़ों की कार्यक्षमता (Lung Function) में 30% तक का सुधार होता है. सांस फूलने की समस्या कम होती है और फेफड़े बेहतर तरीके से काम करने लगते हैं.
1 से 9 महीने: फेफड़ों के सिलिया (बाल जैसी संरचनाएं) फिर से सक्रिय हो जाते हैं, जो बलगम को बाहर निकालते हैं. खांसी, घरघराहट और सांस लेने में तकलीफ काफी हद तक कम हो जाती है.
1 वर्ष बाद: फेफड़े काफी हद तक स्वस्थ हो जाते हैं और सांस लेना बहुत आसान हो जाता है.
10-15 साल बाद: फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौत का जोखिम धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति की तुलना में लगभग आधा हो जाता है.
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