Health care: लिवर दवाओं से ज्यादा आदतों से ठीक होता है. फैटी लिवर आज शहरी जीवनशैली की आम बीमारी बन चुका है. इसमें बाहर से शरीर ठीक दिखता है, लेकिन अंदर लिवर पर चर्बी जमती जाती है. गलत खान-पान, शराब, मोटापा, डायबिटीज़ और शारीरिक सक्रियता की कमी, इन सब के कारण फैटी लिवर की शिकायत हो सकती है. शुरुआती और माइल्ड फैटी लिवर को योग से काफी हद तक रिवर्स किया जा सकता है.
फैटी लिवर क्या है
वसायुक्त यकृत रोग में यकृत में अतिरिक्त वसा जमा हो जाती है. लीवर में वसा की कुछ मात्रा का होना तो सामान्य बात है लेकिन फैटी लीवर बीमारी व्यक्ति को तब होती है, जब वसा की मात्रा लीवर के भार से दस प्रतिशत अधिक हो जाती है. ऐसी स्थिति में लीवर सामान्य रूप से कार्य करने में असमर्थ हो जाता है तथा अनेक लक्षणों को उत्पन्न करता है. इसके बाद फैटी लीवर का इलाज (fatty liver ka ayurvedic ilaj) कराने की जरूरत पड़ती है.
फैटी लिवर के सामान्य लक्षण
पेट में दर्द: पेट के दाहिने हिस्से में हल्का या लगातार दर्द होना.
थकान और कमजोरी: हर समय बहुत अधिक थकान या कमजोरी महसूस होना.
भूख कम लगना: खाने की इच्छा न होना और वजन में अचानक कमी आना
.सूजन: पेट (पेट में पानी भरना) या पैरों में सूजन.
त्वचा में बदलाव: त्वचा और आँखों का पीला पड़ना (पीलिया).
मानसिक भ्रम: गंभीर मामलों में कंफ्यूजन की स्थिति.
फैटी लिवर की गंभीर बीमारी के लक्षण
- पीलिया (आंखों और त्वचा का पीला पड़ना)
- चोट
- गहरे रंग का मूत्र (पेशाब)
- फूला हुआ पेट
- खून की उल्टी होना
- काले रंग का मल (पूप)
- खुजली वाली त्वचा
फैटी लिवर के लिए बेस्ट योग आसन
कपालभाति प्राणायाम
पाचन संबंधी समस्याओं को सुधारने में सहायक, कपालभारती प्राणायाम को लिवर के स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतरीन योगासनों में से एक माना जाता है. यह प्राणायाम चयापचय को बढ़ाता है और पूरे शरीर में रक्त संचार को नियंत्रित करता है, जिससे लिवर को फायदा होता है और फैटी लिवर के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं.
कैसे करें:
- सुबह खाली पेट 5-10 मिनट अभ्यास करें.
- अभ्यास को धीरे-धीरे बढ़ाएं.
धनुरासन
धनुरासन पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक होता है और अंगों की कार्यप्रणाली को बढ़ाता है. यह रक्त संचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ पेट की मांसपेशियों की मालिश भी करता है. यदि आप इसे प्रतिदिन करते हैं, तो आप पाएंगे कि यह ऊर्जा को भी बढ़ाता है और यकृत के कार्यों के लिए आवश्यक हार्मोनों को नियंत्रित करता है.
कैसे करें?
- पेट के बल लेटकर घुटने मोड़े
- एड़ियों को हाथों से पकड़ें.
- शरीर को धनुष का आकार दें.
भुजंगासन
यह प्रक्रिया लिवर के कार्यों को उत्तेजित करने और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर पेट को फैलाने में मदद करती है; साथ ही पाचन क्रिया में सुधार करती है. इसे अपनी दैनिक स्वास्थ्य दिनचर्या में शामिल करें, जो लिवर के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है.
कैसे करें
- पेट के बल लेट जाएं
- हथेलियां कंधों के नीचे रखें
- सांस लेते हुए छाती ऊपर उठाएं
- 15–20 सेकंड रुकें, फिर सामान्य स्थिति में आएं
पवनमुक्तासन
लिवर की समस्या के लिए योग करने से अतिरिक्त लाभ मिलते हैं जो लिवर के कार्यों को उत्तेजित करने में सहायक होते हैं. यह आंतरिक और बाहरी दोनों तरह से काम करता है, क्योंकि यह आसन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और कब्ज से राहत दिलाता है. इसके अलावा, यह क्रोध और निराशा को कम करता है.
कैसे करें?
- पीठ के बल लेटकर पैर मोड़े
- घुटनों को हाथों से पकड़कर छाती से सटाएं
- सिर उठाकर ठोड़ी घुटने से लगाएं.
फैटी लीवर के इलाज के दौरान खानपान और जीवनशैली में लाएं ये बदलाव
- -ताजे फल एवं सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें.
- -अधिक फाइबर युक्त आहार का सेवन करें, जैसे फलियाँ और साबुत अनाज.
- -अधिक नमक,ट्रांसफैट, रिफाइन्ड कार्बोहाइड्रेट्स तथा सफेद चीनी का प्रयोग बिल्कुल बंद कर दें.
- – एल्कोहल या शराब का सेवन बिल्कुल न करें.
- -भोजन में लहसुन को शामिल करें यह फैट जमा होने से रोकता है.
- -ग्रीन टी का सेवन करें. शोध के अनुसार लीवर में जमा फैट को कम करती है तथा लीवर के कार्यकलाप को सुधारती है.
- -तले-भुने एवं जंक फूड का सेवन सर्वथा त्याग दें.
- -इन सब्जियों का प्रयोग ज्यादा करें जैसे पालक,ब्रोक्ली, करेला, लौकी, टिण्डा, तोरी, गाजर, चुकंदर, प्याज, अदरक तथा अंकुरित अनाज खाएँ.
- -राजमा, सफेद चना, काली दाल इन सब का सेवन बहुत कम करना चाहिए तथा हरी मूंग दाल और मसूर दाल का सेवन करना चाहिए.
- -मक्खन, मेयोनीज, चिप्स, केक, पिज्जा, मिठाई, चीनी इनका उपयोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए.
- -नियमित रूप से प्राणायाम करें तथा सुबह टहलने जाएँ.
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