Health tips: भारतीय संस्कृति में भोजन को एक साधना माना गया है, जहां खाने के स्वाद के साथ-साथ उसे ग्रहण करने के तरीके का भी विशेष महत्व है. आधुनिक जीवनशैली में हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि हमारे शरीर का पाचन तंत्र सिर्फ इस पर निर्भर नहीं करता कि हम क्या खा रहे हैं, बल्कि इस पर भी कि हम किस अवस्था में खा रहे हैं. आजकल पार्टीज में अधिकतर लोग खड़े होकर या घूमते-फिरते हुए खाना खाते हैं. यह ट्रेंड धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है और लोग ऑफिस में भी खड़े होकर लंच करना पसंद कर रहे हैं.
खड़े होकर खाना खाने के नुकसान
खड़े होकर खाना खाने से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होने लगती है, जो मोटापा बढ़ाने का कारण बन सकती है. इसके अलावा खाना जल्दी खाने से पेट और दिमाग को यह संकेत नहीं मिल पाता कि पेट भर चुका है. इस वजह से हम ओवरईटिंग कर बैठते हैं. यह आदत धीरे-धीरे वजन बढ़ने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकती है. पाचन तंत्र को सही तरीके से काम करने के लिए शरीर को आराम की जरूरत होती है. खड़े रहने से शरीर का तनाव बढ़ता है और ब्लड फ्लो ठीक से नहीं हो पाता है. इससे पेट में गैस, भारीपन और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बैठकर खाना खाने से शरीर में संतुलन बना रहता है और पेट को भोजन पचाने में मदद मिलती है.
भोजन का सबसे अच्छा तरीका
- भोजन करने का सबसे सही पोस्चर सुखासन (पालथी मारकर बैठना) है. अगर संभव हो तो जमीन पर बैठें, अन्यथा डाइनिंग टेबल पर भी बैठकर भोजन कर सकते हैं.
- भोजन के लिए बैठते समय आपकी रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी होनी चाहिए. झुककर या पेट को दबाकर बैठने से पाचन अंगों पर दबाव पड़ता है, जिससे भोजन ठीक से नहीं पचता.
- सीधा बैठने से पेट की मांसपेशियों को पर्याप्त जगह मिलती है, जिससे ‘गैस्ट्रिक जूसेज’ अपना काम बेहतर कर पाते हैं.
चबाकर खाने का साइंस
- डॉक्टर ने सुझाव दिया है कि भोजन को बहुत धीरे-धीरे और चबा-चबाकर खाना चाहिए. जल्दबाजी में निगलने से हवा भी अंदर जाती है, जो गैस का कारण बनती है.
- उन्होंने एक और जरूरी टिप दिया कि जब आपका पेट 70-80% भर जाए, तभी खाना खाना रोक देना चाहिए.
- ठूस-ठूस कर खाने से पाचन तंत्र पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जिससे आलस और भारीपन महसूस होता है.
भोजन के बाद का ‘शांति काल’
- खाना खत्म करने के तुरंत बाद कभी न उठें. डॉ. शालिनी बताती हैं कि भोजन के बाद कम से कम 2 मिनट शांति से बैठें और उसके बाद ही उठें.
- यह छोटा सा विश्राम शरीर को ‘सिम्पैथेटिक’ से ‘पैरासिम्पेथेटिक’ मोड में लाने में मदद करता है, जो पाचन के लिए बहुत जरूरी है.
- अगर आप एसिडिटी से परेशान हैं, तो खाने के चुनाव के साथ-साथ इन आदतों को सुधारना दवाइयों से अधिक प्रभावी साबित हो सकता है.