बिहार का क्राइम रेट 20 साल में सबसे कम, हत्या- लूट और हिंसक झड़प के मामलों में गिरावट

Bihar News: बिहार में हत्या, डकैती, लूट और दंगों जैसे गंभीर और हिंसक अपराध पिछले 20-25 वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. बिहार पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार द्वारा साझा किए गए 2001 से 2025 तक के आंकड़े यह दिखाते हैं कि राज्य की अपराध स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. जिन अपराधों के कारण कभी बिहार को ‘जंगलराज’ से जोड़ा जाता था, उनमें अब लगातार कमी देखी जा रही है.

अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस ने गिरफ्तारी के मोर्चे पर भी बड़ा रिकॉर्ड बनाया है. डीजीपी के अनुसार, 2024 की तुलना में 2025 में करीब 50 हजार अधिक अपराधियों की गिरफ्तारी की गई. इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल घटनाओं की संख्या ही नहीं घटी, बल्कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई भी पहले से ज्यादा सख्त हुई है.

वर्ष 2025 में घटकर सबसे कम दर्ज हुए मामले

दंगों से जुड़े मामलों में भी ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है. 2014 में दंगों के 13,566 मामले थे, जो 2025 में घटकर 2,502 रह गए. यह 2001 के बाद सबसे कम आंकड़ा है. हालांकि, बलात्कार के मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है. वर्ष 2000 में 746 मामलों से बढ़कर 2024 में यह संख्या 2,205 तक पहुंच गई. 2025 में इसमें मामूली गिरावट आई और 2,025 मामले दर्ज हुए.

साइबर अपराध पर शिकंजा

साइबर अपराध को लेकर बिहार पुलिस की रणनीति और मजबूत की जा रही है. डीजीपी ने बताया कि फिलहाल साइबर थानों की संख्या नहीं बढ़ेगी, लेकिन उनमें तैनात मानव बल की संख्या बढ़ाई जाएगी.

साइबर अपराध के नियंत्रण के लिए एक अलग इकाई का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व आईजी या एडीजी रैंक के अधिकारी करेंगे. पटना में 6-7 मंजिला भवन का निर्माण किया जाएगा, जो साइबर अपराध नियंत्रण का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनेगा.

फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में आई है कमी

गंभीर अपराधों में कमी के बावजूद बिहार में कुल संज्ञेय अपराध बढ़े हैं. जानकारी के अनुसार, इसकी मुख्य वजह चोरी, सेंधमारी, साइबर अपराध, गैर-फिरौती अपहरण और अन्य गैर-हिंसक अपराध हैं. चोरी और सेंधमारी अब कुल अपराधों में बड़ा हिस्सा बन चुके हैं. अपहरण के मामलों में बढ़ोतरी का कारण अक्सर प्रेम प्रसंग, बच्चों के गुम होने और पारिवारिक विवाद बताए जा रहे हैं. जबकि फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में कमी आई है.

महिलाओं के खिलाफ अपराध में राहत

राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) के 2023 के आंकड़ों का हवाला देते हुए डीजीपी ने बताया कि बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर 37.50 है, जो राष्ट्रीय औसत 66.20 से काफी कम है.

राज्य के 855 थानों में महिला हेल्प डेस्क की स्थापना की जा चुकी है. स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं की सुरक्षा के लिए अभया ब्रिगेड का गठन किया गया है, जो जल्द ही सभी जिलों में सक्रिय होगी.

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