Bihar News: बिहार सरकार बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ने और सोशल मीडिया मंचों के संपर्क में रहने से होने वाले दुष्प्रभावों पर नियंत्रण के लिए एक नीति तैयार कर रही है. यह जानकारी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार (23 फरवरी, 2026) को विधानसभा में दी. उन्होने कहा कि नाबालिगों के बीच स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेमिंग बढ़ने पर नियंत्रण का मुद्दा गंभीर चिंता का विषय है. यह बहु-क्षेत्रीय विषय है, जिसमें कई हितधारक शामिल हैं.
बच्चों की डिजिटल लत पर सरकार का कड़ा रुख
जदयू विधायक समृद्ध वर्मा के सवाल पर जवाब देते हुए डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने स्वीकार किया कि बच्चों में मोबाइल और ऑनलाइन गेम की लत एक सामाजिक चुनौती बनती जा रही है. उन्होंने कहा कि यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि बच्चों के व्यवहार और उनकी पढ़ाई को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. सरकार इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कानूनी ढांचे पर काम कर रही है.
ऑनलाइन गेमिंग पर नियंत्रण की तैयारी
सरकार ऑनलाइन गेमिंग के दुष्प्रभावों को देखते हुए एक सख्त नियमावली तैयार कर रही है. प्रस्तावित कानून में आयु सीमा (Age Limit) और समय सीमा (Time Limit) जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं. इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही भी तय की जाएगी ताकि वे बच्चों को लुभावने लेकिन हानिकारक कंटेंट से दूर रख सकें.
भविष्य की रणनीति और कार्यान्वयन
बिहार सरकार जल्द ही इस कानून का प्रारूप (Draft) तैयार करेगी. इसमें विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के इनपुट शामिल किए जाएंगे. आने वाले दिनों में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं, जिससे राज्य के लाखों बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाया जा सके.
जागरूकता और अभिभावकों की भूमिका
सिर्फ कानून बनाना ही काफी नहीं है, इसलिए सरकार स्कूल स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रही है. इस पहल में विशेषज्ञों की सलाह ली जाएगी ताकि बच्चों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाया जा सके. साथ ही, बच्चों की निगरानी के लिए अभिभावकों को सशक्त और जागरूक करने पर भी जोर दिया जाएगा.
इसे भी पढे़ं:-हरिद्वार में कुंभ 2027 की तैयारियां तेज, केंद्र सरकार ने जारी किए 500 करोड़ रुपये