Secrets of Internet Traffic: आज इंटरनेट हमारी जिंदगी का इतना अहम हिस्सा बन चुका है. सुबह उठते ही सबसे पहले इंस्टाग्राम या व्हाट्सऐप स्क्रॉल करना हमारी आदत बन गई है. बिना इंटरनेट के दिन की शुरुआत अधूरी सी लगती है. लेकिन इसका असली राज छिपा है समंदर की गहराई में बिछी हजारों किलोमीटर लंबी फाइबर ऑप्टिक केबलों में, जो भारत को सीधे पूरी दुनिया से जोड़ती हैं.
इंटरनेट की शुरुआत?
इंटरनेट का इतिहास 1960 के दशक में शुरू हुआ, जब ARPANET नाम की तकनीक विकसित की गई थी. इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई थी. यहां की सेना और शोधकर्ताओं के लिए इस नेटवर्क को बनाया गया था. इसके बाद 1990 के समय टिम बर्नर्स-ली ने वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) बनाया, जिसके कारण आज आम लोग आसानी से इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगे है. इसके कारण ही वेबसाइट, ईमेल, सोशल मीडिया जैसी सेवाएं शुरू हुई.
किस रास्ते आता है सारा डेटा?
भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट समंदर के नीचे बिछी हुई हाई कैपेसिटी फाइबर-ऑप्टिक केबलों के जरिए काम करता है. समंदर की गहराइयों में बिछी ये केबल दुनिया भर के कंप्यूटरों और सर्वरों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती हैं. यह एक ग्लोबल नेटवर्क है. जब भी आप अपने फोन पर कुछ सर्च करते हैं, तो आपका डेटा इन्हीं केबलों के जरिए समंदर पार स्थित सर्वरों तक जाता है और वहां से जानकारी लेकर चंद सेकंड्स में आपकी स्क्रीन पर लौट आता है.
कौन संभालता है सबसे ज्यादा ट्रैफिक?
भारत में इंटरनेट पहुंचाने वाले केबल लैंडिंग स्टेशन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के साथ चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और त्रिवेंद्रम में स्थित है. देश के करोड़ों लोगों के डेटा की आवाजाही को बिना किसी रुकावट के चलाने का सबसे मुश्किल काम इन्हीं दो शहरों के सिस्टम संभालते हैं.
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