विवेक रूपी सन्तान ही प्रदान करती है सद्गति: दिव्‍य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि स्मरण और सत्कर्म- दान,यज्ञ या कोई भी सत्कर्म करो, पर साथ-साथ प्रभु का नाम स्मरण भी करते रहो. स्मरण के बिना किया गया सत्कर्म अभिमान पैदा करेगा और की गई सारी मेहनत व्यर्थ जाएगी.

दान और यज्ञ से पुण्य पैदा होगा, पर प्रभु की प्राप्ति नहीं होगी. प्रभु तो करुणापूर्ण हृदय से किए गए नाम-स्मरण द्वारा ही मिलेंगे. स्मरण के बिना न तो हृदय – शुद्धि होगी,  न पाप से मुक्ति मिलेगी और न ही जीवन में शान्ति प्राप्त होगी.

अतः सत्कर्म करो तो प्रभु का स्मरण करते हुए निष्काम भाव एवं नम्रतापूर्वक करो. नहीं तो सत्कर्म से चाहे पुण्य मिल जाय, स्वर्ग मिल जाय, किन्तु प्रभु नहीं मिलेंगे. पुण्य समाप्त होने वाली चीज है. जब वह क्षीण होगा तो स्वर्ग से सिर के बल धकेल दिए जाओगे.किन्तु नाम-स्मरण के साथ किया गया सत्कर्म तो प्रभु के धाम पहुंचाएगा, जहाँ से कोई बाहर नहीं निकाल सकता.

पुत्र-पुत्रियों का मोह नहीं करना चाहिए. विवेक रूपी सन्तान ही सद्गति प्रदान करती है. सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) श्री दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

 

		

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