Amarnath yatra: हिमालय की दुर्गम और बर्फीली वादियों में स्थित पवित्र अमरनाथ की गुफा हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. जो पारंपरिक पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग से गुजरना होता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिन व्यक्तियों को यात्रा के दौरान सफेद रंग के दो अमर कबूतरों के दर्शन होते हैं उसकी किस्मत चमक जाती है. दरअसल इन दो कबूतरों का दिखना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता है. जो कुछ ही सौभाग्यशाली लोगों को दिखाई देते है.
पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव से अमरता के रहस्य के बारे में जानने को कहा, इस पर भगवान शिव ने एक ऐसा स्थान चुना जहां पर कोई दूसरा प्राणी या जीव-जंतु मौजूद न हो. ये ऐसी पावन कथा थी जिसे सुनने वाला व्यक्ति अमर हो सकता था, इसलिए भगवान ने माता पार्वती को ये कथा सुनाने के लिए हिमालय की एक गुप्त गुफा को चुना. जो अमरनाथ गुफा के नाम से जानते हैं.
कथा शुरु होने से पहले भगवान शिव ने एक जगह अपने वाहन नंदी को छोड़ा. उसे पहलगाम के नाम से जाना जाता है. इसके बाद भगवान शिव ने माता को कथा सुनानी शुरू कर दी, जिसके बाद माता पार्वती को नींद आ गई और सो गई, कथा के बीच-बीच में गूं-गूं की आवाज आ रही थी जिससे भगवान को लगा कि देवी पार्वती ही बीच-बीच में हुंकार भर रही हैं. इसी दौरान दो कबूतर भी बड़े ही ध्यान से इस दिव्य कथा को सुन रहे थे.
शिव का ध्यान जब कबूतरों पर पड़ा तो वो क्रोधित हो गए, कबूतरों ने शिव जी से कहा कि अगर आपने हमें मार दिया तो अमर होने की कथा झूठी साबित हो जाएगी. शिव जी ने तब उन कबूतरों को वरदान दिया कि तुम युगों-युगों तक इस स्थान पर शिव-पार्वती के प्रतीक बनकर निवास करोगे. अमरनाथ की गुफा में जिसे भी तुम्हारे दर्शन होंगे उन्हें शिव-पार्वती के दर्शन का पुण्य मिलेगा.