हृदय की शुद्धि के लिए करें ईश्वर की उपासना: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि भक्ति से ही जीवन सुधरता है। अगर हम अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हैं तो ईश्वर की भक्ति अति आवश्यक है। जीवन के एक-एक दोष सुधारने में पूरा जीवन लग जायेगा लेकिन पूर्ण रूपेण जीवन पावन नहीं बन पायेगा। ईश्वर की भक्ति से धीरे-धीरे जीवन पावन बन जाता है। कपड़े में दाग कहां से लगा, कैसे लगा, छोड़ो इन बातों को, साबुन और पानी लेकर धो डालो। जीवन में बुराइयां कहां से आयी, कैसे आयी, इसका चिंतन करने के बजाय, भगवान की भक्ति करो। ईश्वर की भक्ति वह साधन है जिससे जीवन अपने आप निर्मल हो जायेगा।

मृत्यु का दिन ईश्वर को अपना हिसाब देने का दिन है। भक्ति से ही मृत्यु सुधरती है। समय का नाश सर्वनाश है। जीवन की समाप्ति पर ही सत्कर्म की समाप्ति होनी चाहिए। भगवान से प्रार्थना करना चाहिए कि जीवन के आखिरी दिन भी आराधना उपासना के साथ-साथ कुछ सत्कर्म हो जाय।मृत्यु निश्चित है, हमेशा मृत्यु की थोड़ी-थोड़ी तैयारी करते रहो।

प्रभु के साथ प्रीति बांधो, मृत्यु का डर नष्ट हो जायेगा। प्रभु का नाम-स्मरण मरण को सुधारता है। मृत्यु के बाद तो केवल जीवन में किया गया प्रभु-स्मरण एवं सत्कर्म ही साथ जाता है।

सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

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