सरकारी दवाओं की अवैध बिक्री का संगठित रैकेट ध्वस्त, 70 लाख की खेप के साथ 5 आरोपी गिरफ्तार

Delhi: सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त मिलने वाली दवाओं को बाजार में बेचने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस संगठित गिरोह पर कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को दबोच लिया है. पुलिस ने उनके कब्जे से करीब 70 लाख रुपये की दवाएं और दो वाहन भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल सप्लाई में किया जा रहा था.

डीसीपी क्राइम-4 पंकज कुमार ने बताया की क्राइम ब्रांच की एनआर-2 टीम को एसआई प्रीतम चंद की ओर से विकसित की गई गुप्त सूचना के आधार पर इस पूरे नेटवर्क का पता चला. इसके बाद इंस्पेक्टर नीरज शर्मा के नेतृत्व में और एसीपी गिरीश कौशिक की निगरानी में एक विशेष टीम गठित की गई. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 53 वर्षीय नीरज कुमार और 47 वर्षीय सुशील कुमार शामिल हैं, जो उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले हैं.

अन्य शहरों थी सप्लाई

बरामद दवाओं पर ‘GOVT. SUPPLY NOT FOR SALE’ अंकित था, जिससे स्पष्ट हुआ कि ये दवाएं सरकारी अस्पतालों से अवैध रूप से बाहर निकालकर बाजार में बेची जा रही थीं. पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी नीरज कुमार सहारनपुर में आदित्य फार्मेसी के नाम से दवा का थोक कारोबार करता है और दिल्ली से अवैध रूप से दवाएं खरीदकर ब्रोकरों के जरिए अन्य शहरों में सप्लाई करता था. सुशील कुमार टैक्सी चालक के रूप में इन दवाओं के परिवहन में मदद करता था, जबकि लक्ष्मण मुखिया टेंपो के जरिए बड़ी खेप को ट्रांसपोर्ट हब तक पहुंचाता था.

ये दवाएं बरामद

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि डीडीयू अस्पताल के फार्मासिस्ट/स्टोर कीपर बिनेश कुमार और संविदा सहायक प्रकाश मेहतो भी इस रैकेट में शामिल थे. ये दोनों अस्पताल के स्टॉक रिकॉर्ड में हेरफेर कर दवाओं को बाहर निकालते थे और फिर इन्हें अवैध बिक्री के लिए चैनलाइज करते थे. पुलिस ने इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया है. बरामद दवाओं में एंटीबायोटिक्स और क्रिटिकल केयर इंजेक्शन जैसे सेफिक्सीम, अमोक्सिसिलिन, मेरोपेनेम, सेफ्ट्रिएक्सोन, रेबीज एंटीसीरम सहित कई महंगी दवाएं शामिल हैं, जो मरीजों को मुफ्त दी जानी थीं.

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