West Bengal: शुभेंदु सरकार ने घुसपैठ रोकने के लिए अब पूरे बॉर्डर की फेंसिंग यानी तारबंदी पर मुहर लगा दी है. भारत-बांग्लादेश सीमा पर ‘तारबंदी’ और कड़े फैसलों से बंगाल में अवैध घुसपैठ, मवेशियों की तस्करी और जाली नोटों का कारोबार पूरी तरह से रुक जाएगा पश्चिम बंगाल के लिए ये अवैध घुसपैठिए सालों की नहीं बल्कि दशकों पुरानी समस्या हैं. राज्य के कई बॉर्डर बांग्लादेश से लगते हैं. इन्हीं सरहदों से घुसपैठिए देश में घुसते आते हैं.
तारबंदी और सुरक्षा से क्या-क्या बदलेगा:
- हाईटेक सुरक्षा (स्मार्ट बॉर्डर): सीमा पर अब सिर्फ कटीले तार नहीं होंगे, बल्कि बॉर्डर को ‘स्मार्ट दीवार’ के साथ साथ कैमरे, रडार, और मोशन सेंसर लगाए जाएंगे, जिससे अंधेरे में भी घुसपैठि नही आ सकेंगे।
- बीएसएफ की चौकसी में आसानी: कटीले तारों की घेरेवट से सीमा सुरक्षा बल के जवानों के लिए निगरानी करना और घुसपैठियों को रोकना बेहद आसान हो जाएगा。
- भूमि हस्तांतरण का समाधान: पूर्व में भूमि अधिग्रहण की अड़चनों के कारण मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तारबंदी रुकी हुई थी。 अब राज्य सरकार द्वारा बीएसएफ को ज़मीन सौंपने से बचे हुए 569 किलोमीटर के हिस्से पर तार लगाने का काम तेजी से हो रहा है。
- पहचान और वापसी: बाहरी नागरिको की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है。