नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान क्या करें और क्या न करें? यहां जानें व्रत के नियम!

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो इस दौरान माता रानी की विधि विधान पूजा-अर्चना जरूर करें. साथ ही रोजाना उनके मंत्रों का जाप करें और आरती उतारें. कहते हैं जो भी श्रद्धालु नवरात्रि में माता को सच्चे मन से याद करता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. साथ ही घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. इस साल चैत्र नवरात्र 19 से 26 मार्च तक रहेंगे.

चैत्र नवरात्रि 2026 व्रत के नियम

लोग आमतौर पर दिन की शुरुआत घर और पूजा स्थान की सफाई से करते हैं. नहाने के बाद देवी के लिए भोग बनाते हैं, पूजा करते हैं, मंत्र बोलते हैं और आरती करते हैं. वही खाना बाद में प्रसाद के रूप में खाते हैं. माना जाता है कि इन दिनों हल्का और साधारण खाना खाने से शरीर स्वस्थ और संतुलित रहता है.

व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं

व्रत के दौरान कुछ चीजें पूरी तरह से नहीं खाई जातीं जैसे प्याज, लहसुन, गेहूं और चावल जैसे अनाज, दालें, मांस, अंडे, शराब और तंबाकू. इसके बजाय लोग फल, आलू, कद्दू, लौकी, कच्चा केला और दूध से बनी चीजें खाते हैं. पानी, दूध, छाछ और ताजे जूस पी सकते हैं. साधारण नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल होता है. जीरा, काली मिर्च और इलायची जैसे हल्के मसाले ही लिए जाते हैं.

चैत्र नवरात्रि में क्या-क्या करना चाहिए?
  • पूजा और साधना: प्रतिदिन सुबह-शाम माँ दुर्गा की पूजा करें, आरती करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.
  • कलश स्थापना: पहले दिन (प्रतिपदा) घर के मंदिर में विधि-विधान से कलश स्थापना (घटस्थापना) करें.
  • अखंड ज्योति: यदि संभव हो, तो नौ दिनों तक अखंड ज्योति (दीपक) जलाएं.
  • विशेष भोग: नौ दिनों तक माँ के नौ अलग-अलग स्वरूपों को उनकी पसंद का भोग लगाएं, जैसे पहले दिन घी का भोग.
  • उपवास/सात्विक भोजन: व्रत रखें या फलाहार करें. खाने में सेंधा नमक का उपयोग करें और अनाज से परहेज करें.
  • स्वच्छता: घर में, विशेषकर पूजा स्थल पर, साफ-सफाई रखें.
  • ब्रह्मचर्य और सात्विकता: इन नौ दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन-कर्म में सात्विकता बनाए रखें.
  • कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं (9 छोटी लड़कियों) को भोजन कराएं, उन्हें उपहार दें और आशीर्वाद लें.
  • दान-पुण्य: गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें.
  • नियमित दीपक: माता की प्रतिमा के सामने प्रतिदिन घी और हल्दी का दीपक जलाएं. 

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